उपनिषद् कहते हैं एकमेव अद्वितीयम् — "एक अकेला, बिना दूसरे के।" इस्लाम इस गहन सत्य को साझा करता है: ईश्वर एक है, बिना किसी साथी के, बिना रूप के, कल्पना से परे, फिर भी आपके अपने दिल की धड़कन से अधिक निकट।
शाश्वत शांति
सच्ची शांति दुनिया से भागना नहीं है, बल्कि उसके रचयिता के साथ सामंजस्य है। एक ईश्वर के सामने आत्मसमर्पण करने से हृदय को वह शांति मिलती है जिसकी वह हमेशा तलाश में रहा है।
हम यहाँ क्यों हैं?
हमें एक ईश्वर को जानने और उससे प्रेम करने तथा अच्छाई में जीने के लिए बनाया गया है। इसे पहचानना जीवन को दिशा और गहरा अर्थ देता है।